नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। गो माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने,देशभर में गो हत्या पर सख्त कानूनी प्रतिबंध लगाने तथा केंद्र सरकार स्तर पर पृथक गौ सेवा मंत्रालय के गठन की मांग को लेकर सोमवार को गो सम्मान दिवस के अवसर पर नीमच में विशाल जनजागरण पैदल मार्च निकाला गया। इस दौरान हजारों की संख्या में गौभक्तों, गौसेवकों, संत-महात्माओं, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों,व्यापारियों एवं आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे शहर में गो संरक्षण के समर्थन में जयघोष गूंजते रहे और श्रद्धा व आस्था का अनूठा वातावरण देखने को मिला।कार्यक्रम का शुभारंभ लायंस पार्क चौराहे पर मंत्र उच्चारण संकीर्तन एवं रामधुन के साथ हुआ। इसके बाद हाथों में बैनर, तख्तियां और गौ संरक्षण संबंधी संदेश लिए श्रद्धालु संगठित होकर पैदल मार्च के रूप में शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। यात्रा के दौरान "गो माता का सम्मान, देश का सम्मान", "गो हत्या बंद करो" और "गो माता को राष्ट्रमाता घोषित करो" जैसे नारों से पूरा मार्ग गूंज उठा।मार्च में विभिन्न गोशालाओं की ओर से निकाली गई पांच सुंदर झांकियां भी शामिल रही। इन झांकियों में गौ सेवा,गौ संरक्षण और भारतीय संस्कृति में गौ माता के महत्व को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।यात्रा में शामिल संत-महात्माओं ने भी गौ संरक्षण को समाज और राष्ट्र की प्राथमिक जिम्मेदारी बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।कलेक्टर कार्यालय पहुंचने पर महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं केंद्र सरकार के नाम संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन के प्रतिनिधि को सौंपा गया। साथ ही हजारों नागरिकों के हस्ताक्षरों से युक्त समर्थन-पत्र भी प्रस्तुत किए गए। ज्ञापन में प्रमुख रूप से गो माता को राष्ट्रमाता घोषित करने, पूरे देश में गो हत्या पर कठोर एवं प्रभावी कानून लागू करने तथा गौ संरक्षण एवं संवर्धन के लिए केंद्र स्तर पर पृथक गौ सेवा मंत्रालय की स्थापना करने की मांग की गई।आयोजकों द्वारा गो सम्मान दिवस के समर्थन में दोपहर 12 बजे तक शहर के व्यापारिक प्रतिष्ठानों को स्वैच्छिक रूप से बंद रखने का आह्वान भी किया गया था। इस आह्वान को व्यापक समर्थन मिला और शहर के अनेक व्यापारिक प्रतिष्ठानों तथा सामाजिक संगठनों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर इस जनअभियान के प्रति समर्थन व्यक्त किया।इस अवसर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं,बल्कि कृषि,पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य,जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला भी हैं। उन्होंने कहा कि गौवंश के संरक्षण के लिए प्रभावी नीतियों, कठोर कानूनी प्रावधानों और जनसहभागिता की आवश्यकता है। वक्ताओं ने समाज के सभी वर्गों से गौ संरक्षण के इस अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया।शांतिपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में संपन्न हुए इस विशाल पैदल मार्च में महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, अनुशासन और जनसमर्थन का अनूठा संगम देखने को मिला।